New Bewafa Shayari Hindi Me | कम्बख़्त इश्क में क्या गिरे

New Bewafa Shayari Hindi Me

 

औकात नहीं थी ज़माने में जो मेरी कीमत लगा सके,

कम्बख़्त इश्क में क्या गिरे, मुफ्त में नीलाम हो गये।”

 

उसूलों पे जहाँ आँच आये टकराना ज़रूरी है,

जो ज़िन्दा हों तो फिर ज़िन्दा नज़र आना ज़रूरी है।”

 

“मेरे होंठों पे अपनी प्यास रख दो और फिर सोचो,

कि इस के बाद भी दुनिया में कुछ पाना ज़रूरी है?!




“तेरी बेवफाई के अंगारों में लिपटी रही है रूह मेरी,

मैं इस तरह आग ना होता जो हो जाती तू मेरी।”

 

बाज़ी-ए-मुहब्बत में हमारी बदकिमारी तो देखो,

चारों इक्के थे हाथ में, और इक बेग़म से हार गये!”

 

 

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